भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद
केन्द्रीय समुद्री मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान

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भारत के दक्षिण पूर्व और दक्षिण पश्चिम तटों की तारलियों सारडिनेल्ला लोंगिसे

दक्षिण पश्चिम तट पर कोच्ची और दक्षिण पूर्व तट के चेन्नई से संग्रहित तारलियों के कुल 200 नमूनों का ट्रस विश्लेषण किया गया. लगभग 10 लैंडमार्कों को आपस में जोड़कर लैंडमार्कों से निचोड़े गए कुल 21 ट्रस डिस्टान्स वेरियबिल्स बनाने के लिए एक ट्रस नेटवर्क की संरचना की गयी. रूपायित ट्रस मापन का फैक्टर अनालिसिस किया गया, जिस से यह व्यक्त हुआ कि भारत के दक्षिण पूर्व और दक्षिण पश्चिम तटों के स्टोकों के बीच कोई विभिन्नता नहीं है. आकार और रूप में देखी जाने वाली सीमांत विभिन्नता आवास की पारिस्थितिक व्यतियान की वजह से है जो लंबाई भार संबंध और दोनों तटों की जीवसंख्या के अशन के अंतराल की विभिन्नता से व्यक्त है.

भारत के आंध्रा प्रदेश के काकिनाडा उपसागर में विन्‍डो पेन शुक्ति प्‍लाक्युन

भारत के आंध्रा प्रदेश का काकिनाडा उपसागर में विन्‍डो पेन शुक्ति प्‍लाक्युना प्‍लासेन्‍टा समृद्ध रूप से पायी जाती है. यहॉं वर्ष 2011-2012 के दौरान 461.3 टन विन्‍डो पेन शुक्ति का अवतरण किया गया था, कुल 13,777 श्रम दिन के प्रयास द्वारा माध्‍य प्रति एकक पकड़ (सी पी यु ई) 29.7 कि.ग्रा. थी. माध्‍य अवतरण 230.7 टन और माध्‍य प्रयास 6,889 थे. विन्‍डो पेन ओयस्‍टर भारतीय वन्‍य जीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची IV के अंदर संरक्षित की गयी है, फिर भी काकिनाडा उपसागर में जीवित शुक्तियों के लिए क्‍लान्‍डस्‍टाइन मत्‍स्‍यन और विन्‍डो पेन शुक्तियों के जीवाश्‍म कवचों के लिए इनका विदोहन किया जाता है. यह प्रवणता इस उपसागर में विन्‍डो पेन शुक्तियों के स्‍टॉक के लिए बहुत हानिकारक है. काकिनाडा उपसागर में विन्‍डो पेन शुक्तियों के विदोहन के वर्तमान स्‍तर का निर्धारण किया गया. इस प्रजाति के संरक्षण की आवश्‍यकता पर प्रकाश डाला गया और प्रबंधन एवं परिरक्षण के उपायों पर चर्चा की गयी.

भारत के उत्‍तरपश्चिम तट के महाराष्‍ट्र समुद्र में पाए जाने वाले इंडियन स्‍

डेकाप्‍टीरस रसेल्‍ली प्रजाति की 50% मादा मछलियॉं  परिपक्‍व होने की लंबाई 153 मि. मी. आकलित किया गया. जून से अक्‍तूबर और दिसंबर से अप्रैल तक के दीर्घ अंडजननकाल के दौरान प्रैढ़़, परिपक्‍व और अंडमुक्‍त गोनाडों का आकलन किया गया. लिंग अनुपात में 140-149 मि.मी. के लंबाई ग्रुप के 1:0.43 से 110-119 मि.मी. के लंबाई ग्रुप के 1:1 तक की विभिन्‍नता देखी गयी. लिंग अनुपात का महीनावार वितरण यह संकेत देता है कि अप्रैल, मई और नवंबर महीनों में नर मछलियों के वितरण में 5% की प्रमुखता थी. प्रजननक्षमता 29,986 अंडों से 1,52,123 अंडों के बीच में देखी गयी. जी एस आइ अध्‍ययनों के आधार पर यह अनुमान किया जाता है कि इस प्रजाति का अंडजनन काल दिसंबर से मार्च और मई से नवंबर तक दीर्घ है. रिलेटीव कन्‍डीशन फैक्‍टर वेल्‍यू जनवरी में उच्‍चतम देखा गया, जिससे यह संकेत मिलता है कि यह महीना अंडजनन का श्रृंग काल है. नर और मादा मछलियों का लंबाईवार कन्‍डीशन फैक्‍टर 100-229 मि. मी. की लंबाई में अधिकतम था. वर्तमान अध्‍ययन में अंड के व्‍यास का परास 0.01 से 0.97 मि. मी. के बीच में था. यह प्रजाति एक अंडजननकाल में दो बार अंडजनन करती है और दोनों अंडजननकाल के बीच ज्‍यादा अंतराल नहीं होता है.

भारत के दक्षिण तट के शूली महाचिंगट पानुलिरस होमारस होमारस (लिनेअस, 1758) की आकार

तमिल नाडु के पूर्व एवं पश्चिम तटों से मत्स्यन किए गए स्कालोप्ड शूली महचिंगट पानुलिरस होमारस होमारस के आकारमितीय संबंध, कारापेस लंबाई – कुल लंबाई (CL vs TL), कारापेस लंबाई – भार (CL vs W), कुल लंबाई – भार (TL vs W), कारापेस लंबाई – कारापेस चौड़ाई (CL vs CW), कारापेस लंबाई – तीसरे पाद (CL vs III WL) और कारापेस लंबाई – दूसरे उदर (CL vs II ASW) का आकलन किया गया. अध्ययन के लिए कुल 462 नर और 350 मादा महचिंगटों का मापन किया गया. महचिंगटों की कारापेस लंबाई का पारास 20.4 मि. मी. से 101.0 मि. मी. CL था. सभी संबंधों में पावर फंक्शन y=axb का प्रयोग किया गया. CL के संबंध में TL की बढ़ती की प्रवणता का अध्ययन करने के लिए प्रथम डेरिवेटिव dY/dCL-abCLb- 1 जाहां  Y का मतलब TL है, का प्रयोग किया गया. नर महाचिंगटों में प्रतिकूल एलोमेट्री, b<1  देखा गया, जो CL के संबंध में TL की घटती हुई बढ़ती दर में स्पष्ट था. नर और मादा दोनों में CL के प्रति W के संबंध से प्रतिकूल एलोमेट्री, b<3  देखा गया. नर में तीसरे पेरिओपोड की एलोमेट्रिक बढ़ती के आधार पर   लैंगिग परिपक्वता निर्धारित किया जाता है. स्लोप्स आफ रिग्रेशन आफ लोग ट्रान्स्फ़ोर्म्ड आंकड़े से, मादाओं में नकारात्मक एलोमेट्री (b=0.97) की तुलना में नरों के तीसरे पेरिओपोड की सकारात्मक एलोमेट्रिक बढ़ती (b=1.17) देखी गयी. नरों के दूसरे अबडोमेन की चौड़ाई की नकारात्मक एलोमेट्री (b=0.934) की तुलना में मादाओं के दूसरे अबडोमेन की चौड़ाई में सकारात्मक एलोमेट्री (b=1.04) देखी गयी. फिर भी, अपरिपक्व (1.09) एवं परिपक्व (1.01) मादाओं की दो रिग्रेशन रेखाओं ke b मूल्य में 1 से कोई उल्लेखनीय व्यतियान का संकेत न होने के कारण परिपक्वता पर इनकी लंबाई का निर्धारण नहीं किया जा सका. नरों में परिपक्व एवं अपरिपक्व नमूनों की दो रिग्रेशन रेखाएं क्रॉस की जाने की वजह से परिपक्वता पर लंबाई (63.0 मि. मी.) का निर्धारण किया जा सका. वर्तमान अध्ययन के परिणाम क्रस्टेशियनों में संपदा अलोकेशन थियरी का निर्धारण और नर एवं मादा दोनों के संपदा अलोकेशन में मार्क्ड शिफ्ट के निदर्शन के निर्धारण में सहायक होते हैं.

भारतीय तट की तारली सारडिनेल्ला लोंगिसेप्स की जीवसंख्या आनुवंशिकी संरचना

भारतीय तट की तारली, जो वाणिज्यिक एवं पारिस्थिक तौर पर प्रमुख छोटी वेलापवर्ती मछली है, के आनुवंशिक स्टाक संरचना और हिस्टोरिकल डेमोग्राफी का अध्ययन माइटोकोन्ट्रीयल कंट्रोल रीजियन एवं साइटोक्रोम C ऑक्सीडेस I (COI) अनुक्रम उपयुक्त करके किया गया. वितरण रेंच के 10 स्थानों से संग्रहित 287 तारलियों के कंट्रोल रीजियन का 758 bp भाग और  291 तारलियों के COI जीन के 576 bp भाग का आंप्लिफ़ाइंग किया, जिसका परिणाम क्रमशः 236 और 84 हैलोटाइप्स थे. डेमोग्राफिक एकस्पानशन हुए जीवों में पायी गयी विशेषता उच्च हैलोटाइप और कम न्यूक्लियोटाइड विविधता मूल्य (क्रमशः कंट्रोल रीजियन के लिए 0.99 और 0.19 तथा COI के लिए 0.85 और 0.004) थी. कंट्रोल रीजियन और COI जीन मारकेर्स दोनों उपयुक्त किए गए जीवों में आनुवंशिक विभिन्नता, ΦST, कम और प्रमुख नहीं थे. मिसमैच विश्लेषण से दिखाया पड़ा कि हाल डीके डेमोग्राफिक विस्तार और लेट प्लीस्टोसीन एपोक एक साथ हुआ है. मान्टेल परीक्षण से दूरी द्वारा विलगन का अभाव व्यक्त हुआ, जो अधिप्रवास के उच्च स्तर से आनुवंशिक ड्रिफ्ट या हाल के विस्तार रेंच के बाद प्रवास और ड्रिफ्ट का संतुलन बनाने के लिए पर्याप्त समय के अभाव से होगा.

लक्षद्वीप के अमीनी और कड़मत द्वीपों में प्राणिप्लवकों की प्रचुरता

लक्षद्वीप समूह में जनवरी – फरवरी, 2014 के दौरान किए गए सर्वेक्षणों के आधार पर अमीनी और कड़मत द्वीपों के लैगूनों से संग्रहित प्राणिप्लवकों पर अध्ययन किया गया. अमीनी और कड़मत के प्राणिप्लवकों का डिसप्लेसमेंट वोल्यम प्रति 100 m3 के लिए क्रमशः 58.35  और 15 मि. लि. थे. सांद्रता भी कड़मत की अपेक्षा अमीनी में अधिक थी जो प्रति 100 m3 के लिए क्रमशः 64480 और 47726 थी. इन दोनों आवास व्यवस्थाओं से प्राणिप्लवकों की कुल 21 ग्रुपों, जो कि कोपीपोड्स, ओस्ट्राकोड्स, कीटोग्नाथ्स, लूसिफर जाति, मेडूसे, डोलिओलिड्स, माइसिड्स, टिनटिन्निड्स, यूफसीड्स, अप्पेन्डिकुलेरियन्स, साइफनोफोर्स, क्लाडोसीरा, आम्फ़ीपोड्स, आइसोपोड्स, पोलीकीटे डिंभक, झींगा डिंभक, केकड़ा डिंभक, स्क़्विल्ला डिंभक, मोलस्का डिंभक, मछली अंड एवं मछली डिंभक की रिकार्ड की गयी. इनके ग्रुपवार अध्ययन करने से अमीनी द्वीप में कोपीपोड़ों की 40%  प्रमुखता और कड़मत में केकड़ा डिंभकों की अधिकता (50%) देखी गयी. कड़मत द्वीप के पश्चिम भाग के स्टेशन 2 में केकड़े की ज़ोइआ अवस्था की अधिकता केकड़ा डिंभकों की प्रचुरता का कारण समझा गया. कोपीपोड़ों में, अमीनी द्वीप में कलनोइड कोपीपोड की 71% की अधिकता और कड़मत में 81% की अधिकता देखी गयी. अमीनी द्वीप में कोपीपोड़ों की ज़्यातातर प्रचुरता थी, इसके अतिरिक्त ओस्ट्राकोड्स (33%) और केकड़ा डिंभक (14%) भी प्रचुर मात्रा में पाये गए. कड़मत में कोपीपोड़ों की प्रचुरता 20%  योगदान के साथ दूसरे स्थान पर थी, इसके बाद झींगा डिंभक (11%), ओस्ट्राकोड्स (6%) और 5% से कम अन्य ग्रुपों का हिस्सा था. इन दोनों द्वीपों की आवास व्यवस्थाओं का तुलनात्मक अध्ययन करने पर यह देखा गया कि कड़मत की अपेक्षा अमीनी में कोपीपोड़ों और ओस्ट्राकोडओं की अधिकता थी, बल्कि कड़मत में केकड़े की ज़ोइआ अवस्था की अधिकता की वजह से केकड़ा डिंभक बड़ी मात्रा में देखे गए. इन दोनों आवास व्यवस्थाओं के प्राणिप्लवकों की मात्रात्मक एवं गुणतात्मक प्रचुरता पर चर्चा की गयी.  

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