भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद
केन्द्रीय समुद्री मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान
  • Protozoan parasitePerkinsus olseni in oyster tissue
  • Thorny-headed wormTenuiprobosis sp. in the intestine of cultured marine fish
  • Acanthocephalan infection in red snapper
  • Genomics Laboratory
  • Biotechnological products: Varna Fish Feed and Nutraceuticals

Home समुद्री जैवप्रौद्योगिकी

समुद्री जैव प्रौद्योगिकी प्रभाग

अनुसंधान के महत्वपूर्ण क्षेत्र Thrust Areas of Research:

मत्स्य आनुवंशिकी, जीनोमिक्स, आण्विक जीवविज्ञान और मत्स्य शरीरक्रियाविज्ञान

मछली पोषण


मछली स्वास्थ्य (रोगविज्ञान, सूक्ष्मजैविकी, प्रतिरक्षाविज्ञान, कोशिका संवर्धन और आण्विक निदान)


जैव रसायन और जैवपूर्वेक्षण

 

Ongoing Research Projects:                                     चालू अनुसंधान परियोजनाएं

क.  गृहांदर परियोजनाएं

समुद्री संवर्धन और मात्स्यिकी संपदा प्रबंधन में आनुवंशिकी, जीनोमिक्स एवं जैवप्रौद्योगिकीय अनुप्रयोग

ब्लाक लिप मुक्‍तर शुक्ति पिंकटाडा मारगरिटिफेरा से मोती के पात्रेन उत्पादन के लिए ऊतक संवर्धन प्रौद्योगिकी का विकास एवं पिंकटाडा फ्यूकेटा में पात्रेन मोती उत्पादन का शोधन

समुद्री संवर्धन और जलकृषि के लिए चयनित पख मछली एवं कवच मछली में स्वास्थ्य प्रबंधन और समुद्री संपदाओं से जैव पूर्वेक्षण

 ख. प्रायोजित परियोजनाएं

जीनों का बयोप्रोस्पेक्टिंग एवं अजैविक दबाव सह्यता हेतु एलील घनन. एन ए आइ पी  की वित्‍तीय सहायता

भारतीय तट पर भारतीय बांगडे के प्रजनन स्टोक पर आनुवंशिक अध्ययन.  एफ ए ओ-बी ओ बी एल एम ई  की वित्‍तीय सहायता

समुद्री संवर्धन व्‍यवस्‍थाओं में प्रयोग करने के लिए  स्‍यूडोमोनास, बासिलस और माइक्रोकोकस के समुद्री पर्यावरण से लाइब्ररी ख्‍यात प्रोबयोन्‍टों का विकास. कृषि एवं इससे जुड़े हुए सेक्‍टरों में सूक्ष्‍मजीवों का प्रयोग (ए एम ए ए एस) परियोजना सं. 2020600004 

समुद्र से दवाः समुद्र जीवों और सूक्ष्‍म-जीवों से रोगाणुरोधी, प्रतिसूजन और कैन्‍सररोधी एजेन्‍टों का विकास – एम ओ ई एस

ऑक्सिडेशन स्‍ट्रेस और इन्‍फ्लमेशन के प्रति रक्षा चयापचयों के रूप में समुद्री स्थूल शैवालों से जैवसक्रिय यौगिकों का निरूपण

न्‍यूट्रास्‍यूटिकलों और जलकृषि खाद्य के संपूरकों में प्रयुक्‍त करने हेतु स्‍थानीय रूप से उपलब्‍ध कम मूल्‍य की मछली एवं मात्स्यिकी उपपकड़ों से बहुअसंतृप्‍त वसा अम्‍ल (Polyunsaturated fatty acid) से समृद्ध योगों की तैयारी. डी एस टी-एस ई आर बी

चुनी गयी वाणिज्यिक प्रमुख ट्यूनाओं में आहार विश्‍लेषण के लिए आण्विक पहॅुंच. डी एस टी

 

ग. भा कृ अनु प आउटरीच / नेटवर्क परियोजनाएं

मछली खाद्य

आहार घटक के रूप में मछली का पोषण प्रोफाइलिंग एवं मूल्यांकन

मछली आनुवंशिकी स्टॉक

जलीय जीवों के रागों के लिए राष्ट्रीय निगरानी कार्यक्रम (एन एस पी ए ए डी)

जलवायु लचीला कृषि पर राष्ट्रीय नवोन्मेष (एन आइ सी आर ए)

  

पूरी की गयी अनुसंधान परियोजनाएं  Completed Research Projects:

 

  • गृहांदर परियोजनाएं

 

समुद्री केंकडों, महाचिंगटों, अलंकारी एवं पिंजरे में पालित पख मछली के लिए पालन एवं डिम्भक खाद्य का सूत्रीकरण एवं मूल्यांकन MBTD/NUT/01

समुद्री संवर्धित पख मछली और कवच मछली में रोगाणु प्रोफाइलिंग, निदानात्मक एवं स्वास्थ्य प्रबंधन

समुद्री संवर्धन एवं परिरक्षण में जैव प्रौद्योगिकीय प्रयोग

 

  • प्रायोजित परियोजनाएं

 

आर्थिक रूप से प्रमुख कवच मछली प्रजातियों जैसे हरित शंबु (पेर्ना विरिडिस) एवं खाद्य शुक्ति (क्रसोसट्रिया मड्रासेन्सिस) के पालन एवं संपदा प्रबंधन में प्रयुक्त करने हेतु प्रजाति विशिष्ट डी एन ए मार्कर का विकास

पेनिअस मोनोडोन के प्रेरित परिपक्वन और अंडजनन के लिए सी एम जी परिवार रीकोम्बिनन्‍ट हारमोन, उनके विरोधी, आर एन ए तकनीक का विकास एवं प्रयोग

गुणात्मक एवं आणविक औजारों के ज़रिए लवण चिंगट आर्टीमिया के आनुवंशिक रूप से सुधार किए गए प्रभेदों का विकास

मन्नार खाडी के लाल एवं भूरे समुद्री शैवालों से नवीन आंटीओक्सिडेंट का वर्णन

राबिट फिश सिगानस कनालिकुलेटस  और समुद्री अलंकारी मछली डासिलस ट्राइमाकुलेटस की कोशिका रेखाओं के स्थापना एवं वर्णन

मछली खाद्य

आहार घटक के रूप में मछली का न्यूट्रीयंट प्रोफाइलिंग एवं मूल्यांकन

मत्स्य आनुव‍ंशिक प्रभव

 

ग. परामर्श परियोजनाएं

टाइगर महाचिंगट के विशिष्‍ट रोगजनक मुक्‍त (एस पी एफ) पालतू बनाने के लिए महाचिंगट पोषण में परामर्श – परियोजना (डी टी एस पी), राजीव गांधी जलकृषि केन्‍द्र (आर जी सी ए) वर्ष 2010

केरल, भारत के लिए प्रासंगिक ओ आइ ई सूचीकृत रोगजनकों के स्‍क्रीनिंग पर परामर्श – केरल अक्‍वा वेंच्‍वुएर्स इन्‍टरनाशनल लिमिटड (के ए वी आइ एल), फिशरीस समुच्‍चय बिल्डिंग, सलिम अली रोड, एरणाकुलम, केरल – 682018 को वर्ष 2012 में परामर्श दी गयी.

 

 प्रौद्योगिकियॉं/ अवधारणाएं/ जांच-परिणाम   Technologies/Concepts/Findings                                       

  • सूक्ष्‍मशैवाल और एबयोटिक स्‍टेसः भारतीय तट के विभिन्‍न आवासें के समुद्री सूक्ष्‍मशैवालों के 144 शुद्ध विलगनों का, करीब 80 विलगनों के फीनोटिपिक और जीनोटिपिक विवरणों के साथ संग्रहण, विलगन और अनुरक्षण किए गए. सूक्ष्‍मशैवाल टेरासेल्मिस इंडिका (पुलिकाट झील से विलगन किया गया अतिलवण सूक्ष्‍मशैवाल) से सबट्राक्‍टीव सप्रेशन हाइब्रिडाइसेशन (एस एस एच) तरीके से लवणता सह्यता के लिए एक एबयोटिक स्‍ट्रेस जीन की पहचान की गयी और RACE-PCR तरीका उपयुक्‍त करके इसका लक्षण वर्णन किया गया. ‘लवणता सह्यता का यह माइन्‍ड जीन’ ट्रांसजेनिक अध्‍ययन में उपयोगी बन जाएगी.
  • समुद्री अलंकारी मछली के लिए तैयार किया गया खाद्य कडलमीनTM वर्णा श्रेणी का परीक्षण किया गया और सी एम एफ आर आइ के विभिन्‍न केन्‍द्रों में जलजीवशाला पालन सुविधाओं के लिए नेमी रूप से इसका उपयोग किया जा रहा है और जलकृषि विशारदों से इसकी व्‍यापक स्‍वीकार्यता प्राप्‍त हुई है, सी एम एफ आर आइ मुख्‍यालय, कोच्‍ची के ए टी आइ सी काउन्‍टर से यह बेचा जाता है. इसके पेटेंट के लिए आवेदन ‘समुद्री अलंकारी मछलियों के लिए सूत्रित खाद्य एवं उत्‍पाद’ फाइल किया गया है. इस खाद्य के वाणिज्‍यीकरण के लिए प्रयास जारी हैं.
  • बीटा नोडा वाइरस (वी एन एन) का पता लगाने के लिए रिवेर्स ट्रान्स्क्रिप्‍टेस लूप- मीडिएटड आइसोथेर्मल एम्प्लिकेशन (एल ए एम पी) विकसित किया गया, जो एक संवेदनशील तथा विशिष्‍ट डी एन ए पर आधारित नैदानिक तरीका है और उम्‍मीदवार पखमछली अंडशावकों, डिंभकों और पालित मछली की स्क्रीनिंग के लिए उपयुक्‍त किया जा सकता है. यह विधिमान्‍यकरण के अधीन है.
  • भारतीय उपमहाद्वीप के क्रासोस्ट्रिया माड्रासेन्सिस में पेर्किनसस बीहाएन्सिस की प्रथम रिपोर्ट. भारतीय खाद्य शुक्ति क्रासोस्ट्रिया माड्रासेन्सिस में पेर्किनसस प्रजातियों की उपस्थिति के लिए किए गए रूपरेखा अध्‍ययन से भारतीय उपमहाद्वीप और दक्षिण एशिया की सी. माड्रासेन्सिस जीवसंख्‍या में पहली बार पी. बीहाएन्सिस की उपस्थिति व्‍यक्‍त हुई.
  • अनूठा बयोकेमिकल इंजिनीयरिंग द्वारा समुद्री सूक्ष्‍मशैवाल नव न्‍यूट्रास्‍यूटिकलों का विकास किया गया हरा शंबु (पेर्ना विरिडिस), कडलमीनTM GMe, और न्‍यूट्रास्‍यूटिकल कडलमीनTM GAe विकसित किए गए. ये न्‍यूट्रास्‍यूटिकल जोडों के दर्द के उपचार के लिए प्रभावकारी है और कृत्रिम एन एस ए आइ डी (जैसे अवांछित पार्श्‍वफल होनेवाले एस्पिरिन युक्‍त दवा जैसे) के बदले में उपयोग किया जा सकता है. पेटेंट फाइल करने के पश्‍चात कोच्‍ची के अमाल्‍गम ग्रुप की कंपनी और हैदराबाद के सेलेस्टियल बयोलैब द्वारा इसका वाणिज्‍यीकरण किया गया.

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